मजबूरी

हम सोचते है कि सब कुछ हमारे हाथ में होता है। हम जैसे चाहे वैसे अपनी जिंदगी जी सकते है। पर जब समय की मार पड़ती हैं तो हमे ये बात समझ में आ जाती हैं कि हम परिस्थिति के आगे कितने मजबूर होते है। अपना सम्मान , आत्मगौरव और स्वाभिमान सब परे रख कर हालात के साथ ना चाहते हुए भी  समझौता करना पड़ता है , वो भी अपने आसूं छुपा कर हंसते हुए। आखिर ये जिंदगी क्यों इतने इम्तहान लेती है हमारे।  जो हम नही चाहते बार बार उसी के सामने क्यों लाकर खड़ा कर देती है।।क्यों परिस्थितियां हमे इतना मजबूर कर देती है कि ना चाहते हुए भी हमसे वही करवाती है जिसके लिया आत्मा तैयार नही होती।

Comments

Popular posts from this blog

गीत गाता चल रे मेरे मन ।

कब कौन है कौन नही, ये कोई भी नही जानता , फिर भी बस जीना चाहता है।