कब कौन है कौन नही, ये कोई भी नही जानता , फिर भी बस जीना चाहता है।
जीवन कितना अनिश्चित सा होता चला जा रहा है।हर पल मन में एक डर सा लगा रहता है कि न जाने अगले पल किसके न होने की खबर आ जायेगी और न जाने किसके बिना जीने की आदत डालने पर मजबूर कर देगी ये जिंदगी।सोचो तो भी अंदर तक रूह कांप जाती है।फिर भी इंसानों को देखो बस लड़ता ही रहता है।तेरा मेरा करता ही रहता है। हँसी आती है मुझे ऐसे लोगो को देख कर।
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