सही समय पर शिक्षा का मूल्य न समझने के परिणाम।
हर उम्र की अपनी ही एक मांग होती है , जिसे उसी समय में पूरा कर देना उचित होता है । विद्यार्थी जीवन उम्र का वह पड़ाव है , जहा बस शिक्षित होना ही मांग हो सकती हैं।परंतु अफसोस बच्चे उस मांग को अनदेखा कर देते है और जीवन दूसरी व्यर्थ की बातो में गवां देते है।और जब तक बात समझ आती है तब तक सब कुछ हाथों से निकल गया होता है। रह जाता है बस पछतावा ।शिक्षा एकमात्र जरिया है , जीवन में आने वाली हर परिस्थिति का मुकाबला करने का । शौक तो कभी भी पूरे किए जा सकते है , पर अधूरी शिक्षा बाद में पूरी करना बहुत कठिन हो जाता है। इसलिए समय रहते ही इसका महत्व समझ लेना ही सही है।
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