उम्र के पड़ाव और अनुभव
जब से होश संभाला जीवन ने बस उठा पटक ही की है मेरे साथ । शिकायत नही हैं , पर थोड़ा सा दुख जरूर होता है । जब जब जीवन ने दुख दिया हर बार किस्मत को मन भर कोसा और भगवान के सामने तो ढेर ही लगा दिया शिकायतों का । ऐसा लगता था मानो दुनिया की सबसे दुखी इंसान में ही हूं। पर जैसे जैसे समय बीतता गया समझ में आता गया कि ये सब तो बस सोना तपाने की प्रक्रिया थी बस । खूब तराशा है सच में मुझे भगवान ने । एक एक करके सारी कमियां दूर करते गए मेरी । हर बार की परीक्षा का एक नया ही परिणाम आया है मेरे सामने । पहले जो जीवन बस रोने में , शिकायते करने में गुजरता था , वही अब बस प्रभु को धन्यवाद देने में ही बीत रहा है । अब समझ में आ रहा है को क्यों अनुभवी इंसान के पास बैठने को बड़े बुजुर्ग कहा करते थे। ।🙏
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