नादानी बड़ी या जिंदगी

क्यों नहीं समझती आज की ये युवा पीढ़ी कि जिंदगी कोई मजाक नहीं है। स्कूल का सिलेबस तो पहले  से पता होता हैं सो पढ़ कर पास हो जाते है।पर जिंदगी जो इम्तहान लेती है वो तो सब unseen होता है। हर कदम पर एक नया इम्तहान और हर बार पास हो वो भी कहां जरूरी है। पर नहीं इन्हे तो कुछ भी जैसे समझना ही नहीं है। बहुत डर लगता हैं जब इनके भविष्य के बारे में सोचती हूं कि कही ये इम्तहान में पास न हुए तो क्या ये झेल पायेंगे अपनी असफलता को।बस यही प्रार्थना है भगवान से कि ये कभी डरे नहीं और समय रहते सब समझ जाए।

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