अनदेखा सा , अनजाना सा, पर फिर भी बस हमारा
हम सब जानते है कि वो हर चीज जो बनती हैं कभी कभी न मिटने के लिए ही तो बनती है।पर फिर भी जिसे देखो बस पागल हुआ जा रहा है हर अपनी उस चीज के लिए जो उसकी है ही नहीं। उस पागलपन में वो ना जाने क्या क्या करता चला जाता है।एक ऐसी अंतहीन स्पर्धा जिसका परिणाम जानते तो सब है पर मानना नही हैं किसी को भी। वाह भाई ये भी सही है। कहते है ना कि " दिल को बहलाने को गालिब खयाल अच्छा है "।
Must have to understand the all things which effect us very closely...very nice to be here
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