जीवन जीने का सही तरीका
सब जैसे जीते है क्या वही जीना होता है सही मायने में।सुख दुख आशा निराशा तो सबके जीवन में आते जाते ही रहते है।पर उनके आगे घुटने क्यों टेक देना।दुख न आए तो भला सुख का मोल कोई क्या जानेगा।निराशा भरे जीवन से ही तो आशा की किरण निकलती है न।फिर शिकायत किस बात की। और गम कैसा।
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